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स्ंारक्षित इमारतों के दायरे में  अवैध निर्माण की भरमार
November 23, 2019 • RAGINI SINGH

स्ंारक्षित इमारतों के दायरे में  अवैध निर्माण की भरमार
पुरातत्व विभाग, मास्टर प्लान और पुलिस की कारगुजारी
जौनपुर। (आरएनएस) नगर के दर्जन भर से अधिक पुरातत्व सरंक्षण की इमारतों के आस पास नियम कानून को धता बताकर निर्धारित प्रतिबन्धित क्षेत्र के अन्दर अवैध निर्माण कराकर मोटी कमाई की जा रही है इसमें पुरातत्व विभाग, मास्टर प्लान और पुलिस की प्रमुख भूमिका है। जिला प्रषासन और विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपने कर्तव्यों से विमुख होकर सरकार की मंषा पर पानी फेरने का काम कर रहे है। बताते है कि नगर के बड़ी मस्जिद, अटाला मस्जिद, फिरोज ष्षाह का मकबरा सिपाह, झंझरी मस्जिद सिपाह, चार अंगुल मस्जिद मुल्ला टोला, बारादुअरिया कटघरा आदि ऐतिहासिक इमारते पुरातत्व विभाग के सरंक्षण में है। भारत सरकार का निर्देष है कि राष्ट्रीय महत्व के केन्द्रीय संरक्षित स्मारक पुरातत्व स्ािल विनियमित क्षेत्र है। पुरातत्व स्थल एवं अवषेष अधिनियम 1958,1959 एवं भारत सरकार के राजपत्र में  प्रकाषित अधिसूचना संख्या 1764 के प्रावधानों के तहत अवैध है। इस अधिनियम के साथ ही संरक्षित सीमा के 100 मीटर क्षेत्र को प्रतिनिषिद्ध क्षेत्र एवं इससे आगे 200 मीटर के क्षेत्र को निनियमित क्षेत्र घोषित किया गया है। प्रतिनिषिद्ध क्षेत्र में  निर्माण खनन आदि पूर्णतया वर्जित है। जबकि विनियमित क्षेत्र में आयुक्त मण्डल सह सक्षम अधिकारी द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर ही निर्माण, मरम्मत आदि कार्य किये जा सकते है। संरक्षित स्मारकों के संरक्षित सीमा के आगे 300 मीटर परिधि में  सक्षम अधिकारी के अनुमति के बिना निर्माण , मरम्मत आदि वर्जित है। इसमें दोषी व्यक्तियों को दो साल की कैद या एक लाख जर्माने अथवा दोनों से दंण्डित करने का प्रावधान है। लेकिन इन नियम को धता बताते है स्मारकों के संरक्षित क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में दुकान मकान अवैध रूप से बनवा दिया गया है। इसमें पुरातत्व के अधिकारी के साथ ही पुलिस और मास्टर प्लान अवैध निर्माण करने वालों से मोटी रकम लेकर मनमानी निर्माण की अनुमति प्रदान कर देते है। सूत्रों ने बताया है कि पुरातत्व विभाग के अधिकारी उन्ही के खिलाफ एफआईआर कराते हैं जहां से उन्हे रकम नहीं मिलती। धन उगाही करने वालों को निर्माण की मौन अनुकति प्रदान कर दिया जाता है।  पुरातत्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मैं यहां एक साल से कार्यरत हूं इस दौरान दो दर्जन से अधिक अवैध निर्माण के बारे में एफआईआर कराया और इसकी सूचना सारनाथ स्थित कार्यालय को दिया कई मामले में रिमाइण्डर भी दिया गया लेकिन पुलिस ने अवैध निर्माण वालों के खिलाफ कार्यवाही नहीं किया। उधर मास्टर प्लान के जेई जहां बिना नक्षा के मकान बनवाने के नाम पर कमाई कर रहे है वहीं संरक्षित क्षेत्र की सीमा में दर्जनों लोगों को मोटी रकम लेकर नक्षा भी पास कर दिया गया है। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष ने बताया कि पूरे प्रकारण को जल्द की प्रमाण सहित जिलाधिकारी को सौप कर जांच कराने का अनुरोध किया जायेगा।